Why Wing Chun Is Good For Us

Wing Chun a martial art from China with Indian origins has a lot to offer for our physical health and mental wellbeing.

  1. Simplicity works wonders for your body: Wing Chun is very easy to learn with its plain movements. This training is easy to learn regardless of age or gender. You don’t have to be in top health shape to do it, since it depends on your body gets taught efficiency of motion. This doesn’t save energy – it shows you to use it more efficiently.
  2. Reduces stress: This benefit comes as you are trained to focus entirely in the present moment, forgetting the past and stop worrying about the future. It doesn’t mean problems disappear, but the training increases your focusing ability and inner sense of peace, thus giving you more self-control. Fighting an opponent is not about killing or harming somebody but using your energy to protect yourself with least violence.
  3. Improves reflexes: The ability to respond intuitively to a dangerous situation is a useful asset. Our reflex actions with the help of muscle memory and eye reflexes to discern warning signals may save our lives. This skill is bestowed on us by the Wing Chun training. The sudden falling of objects or some harmful objects approaching us can be stopped in time. The eye movements with the coordination of our brain will always give us a big advantage while fighting or facing a dangerous situation. Your body makes the correct moves in your favour.
  4. Here you develop your speed and inner energy, “Qi” increases with little effort. The only necessity is to train regularly. One more plus point here is that you need a very small place to do it. Your office or your study room with a little leg space will do.
  5. Another very beneficial effect is that you become mentally tough and resilient. It instils discipline so that you become more organised in other areas of life. Slowly, you will increase self-confidence and faith in what you do. You don’t waste your time worrying, regretting, abusing somebody mentally and many useless exercises which our minds make us do. In other mind control and orderly life is a given in Wing Chun.

Wing Chun Kung Fu Martial Art Academy,India
Sifu-Dr. Sonu Kumar Giri.

High blood pressure

हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure)

आज जिसे देखो ‘हाई ब्लड प्रेशर की दवा ले रहा है। क्या पुरूष क्या स्त्री, यहां तक कि बच्चों में भी यह रोग पाया जाने लगा है। सब आधुनिक जीवन की देन है। आज पैसा है, ऐशोआराम है, तेज गति है। सुविधाओं का अंत नहीं। आंखें चुंधियाती चकाचौंध हैं, गलाकाट प्रतियोगिताओं की मारामारी और है प्रकृति के नियमों का अविवेकपूर्ण उल्लंघन। ऐसे में सुकून ही एक ऐसी नायाब वस्तु है जिसकी चाह हर एक को है लेकिन जो जीवन से लुप्त हो चला है।

मशहूर हृदयरोग विशेषज्ञ डॉक्टर विमल छाजेर के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर का मुख्य कारण स्ट्रैस है। जैसे ही व्यक्ति सुकून से भरा होता है, ब्लड प्रेशर नीचे आ जाता है। कम कार्य हो, समय का दबाव न हो, एक सुखी संतुष्ट पारिवारिक जीवन हो, निन्यानवे का फेर न हो, व्यक्ति अहम् से बौराया न हो और ईश्वर में आस्था हो, यही हाई ब्लड प्रेशर के लिये सबसे अच्छा यानी कि बेस्ट प्रेस्क्रिप्शन है।

हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण :-

. असमंजस, कनफ्यूजन और थकान

. उल्टी जैसी फीलिंग और पेट की गडबडी।

. दृष्टि में बदलाव या समस्या

. अत्यधिक पसीना आना

. पीलापन या ललाई

. नाक से खून आना

. बेचैनी (नर्वसनेस)

. धडकन का तेज या असामान्य होना

. कानों में घंटी सी बजना

. इम्पोटेंस

. सिरदर्द

. सिर घूमना, चक्कर से आना

डेश डायट :- डेश डायट का मतलब है डायटरी एप्रोचेज टू स्टॉप हाइपरटेंशन। यानी कि हाइ ब्लड प्रेशर को रोकने के लिए अपनी डायट को ठीक रखना। इसमें जो डायट का सुझाव दिया जाता है वह है अनाज, दाल, फल, सब्जी और कम वसा युक्त डेयरी प्रॉडक्ट्स डबल टोन्ड मिल्क या चिकनाई हटाकर दूध से बनी चीजें।

डेश डायट लेने से आपका ब्लड प्रेशर मेंटेन रहेगा और आपका कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लाइसेरिड लेवल मेंटेन रहेगा। आपके शरीर का वजन मेंटेन रखने में ये सहायक होगा।

आपके रक्त में ग्लूकोज लेवल मेंटेन रहेगा। अस्थियों के रोग से बचाव होगा।

डेश डायट में कम वसायुक्त डेयरी प्रॉडक्ट्स जो कि कैल्शियम युक्त होते हैं, शामिल हैं। ये हाई ब्लड प्रेशर को कम करते हैं। विभिन्न स्टडीज से पता चलता है कि भरपूर कैल्शियम लेने से हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद मिलती है।

कुछ अन्य बातें जिनको आपको अपना हाई ब्लड प्रेशर नॉर्मल रखने के लिये ध्यान रखना होगा वे हैं :-

सर्वप्रथम खाने में नमक की मात्रा कम कर दें। दाल या सब्जी में अतिरिक्त नमक कभी न डालें। सलाद में नमक की बिल्कुल जरूरत नहीं होती। पापड अचार, चटनी, प्रोसेस्ड फूड से परहेज करें।

जैसा कि ऊपर लिखा गया है हाई ब्लड प्रेशर में कैल्शियम मुफीद है, इसलिए कम से कम ८०० मिलीग्राम कैल्शियम अवश्य लें। यह तीन कप दूध से प्राप्त हो जाता है।

लहसुन की ३-४ कलियां प्रतिदिन लेने से भी ब्लड पे्रशर ठीक रहता है।

प्रतिदिन २० ग्राम फाइबर लेने से कोलेस्ट्रॉल में भी कमी आती है और बी पी भी घटता है। आहार में फाइबर, चोकर वाले आटे की रोटी, दाल, फल जैसे सेब, आम, केले, आडू इत्यादि तथा ओटमील दलिया कॉर्न से प्राप्त हो सकता है।

अपने आहार में विटामिन सी की मात्रा बढाएं। ये अमरूद, आंवला, हरी मिर्च, टमाटर तथा खट्टे फलों में पाया जाता है। बी.पी कम करने के लिए विटामिन सी की टेबलेट भी ली जा सकती है।

रिसर्च दर्शाते हैं कि पोटेशियम भी बी.पी लो करता है। अमेरिकी डायटीशियन जेम्स वेल्स की मानें तो हाई ब्लड प्रेशर की प्राब्लम वालों को कम से कम २०० मिलीग्राम पोटेशियम रोज लेना चाहिए। एक आलू में ८४४ मिलीग्राम और एक केले में ४५१ मिलीग्राम पोटेशियम है। संतरा और दूध में भी काफी पोटेशियम होता है।

उच्च रक्तचाप (हाई बी पी) चूंकि लाइफस्टाइल से जुडी बीमारी ज्यादा मानी जाती है तो इससे संबंधित कुछ बातों को भी ध्यान में रखा जाए तो अच्छा होगा।

हंसना अच्छे स्वास्थ्य का पासपोर्ट है। ऐसी फिल्में प्रोग्राम्स सीरियल्स देखिए जो आपको हंसी से दोहरा कर दें। तनाव कम होगा तो बी पी भी कम होगा।

क्रोध बी पी का दुश्मन है। चीखने चिल्लाने, टैंपर लूज करने से बी पी एकदम बढता है। बोली में मिठास घोलकर मुलायम स्वर में बोलने की आदत डाल लेंगे तो झगडे भी कम होंगे और क्रोध भी दूर रहेगा।

एरोबिक व्यायाम बी.पी से बचाता है। तनाव दूर करता है। मनोवैज्ञानिक डॉक्टर सिगमैन के अनुसार पूरे दिन में कम से कम आधा घंटा सिर्फ अपने लिए निकालिए। इस समय आप अपना मनपसंद कुछ भी काम कर सकते हैं बशर्ते उससे आपका मनोरंजन हो और आप रिलेक्स फील करें।

रिसर्च बताते हैं कि मोटापा कम करने से बी पी लो होता है। एक स्टडी के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर के ५० प्रतिशत पेशेंट्स को वजन कम करने के बाद दवा लेने की जरूरत ही नहीं रही।

तनाव आधुनिक जीवन का एक हिस्सा बन चुका है अब यह आप पर निर्भर करता है आप इसे कैसे मैनेज करें। लगातार काम न करें। इसी तरह टीवी के आगे घंटों चिपके न बैठे रहें बीच में ब्रेक लेना, थोडा हल्का फुल्का व्यायाम या आंखें मूंद कर रिलेक्स करना अच्छा रहेगा।

आजकल मेडिटेशन की अहमियत भी लोग खूब समझने लगे हैं। यह एक अच्छा साइन है। ध्यान से चित्त शांत होता है। एकाग्रता लाने के लिए मन को साधना जरूरी है और ये ध्यान, मेडिटेशन से संभव हो सकता है।इन बातों का अगर ध्यान रखा जाए तो कोई कारण नहीं कि आपका बी पी १२०/८० ना बना रहे।

-डॉ. पंकज यादव

Padmasana is a boon for heart patients (हृदय रोगियों हेतु वरदान है पद्मासन)

वर्तमान सदी में मानवो में ह्रदय विकार का बड़े तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, पर हम योग द्वारा इस रोग पर नियंत्रण कर सकते है, योग का एक अचूक आसान – पद्मासन हमें इस विकार से दूर रख सकता है.
‘पद्म का अर्थ है कमल। जब पद्मासन किया जाता है तो वह कमल के समान दिखाई देता है। इस आसन को ‘कमलासन के नाम से भी जाना जाता है। ध्यान एवं जप के लिए पद्मासन मुख्य आसन माना जाता है। यह आसन स्त्री एवं पुरूष दोनों के लिए ही अनुकूल माना जाता है।
पद्मासन के दो प्रकार होते हैं जिन्हें पद्मासन एवं बद्घपद्मासन के नामों से जाना जाता है। इस आसन के करने से अनेक फायदे होते हैं। मुख्य रूप से दमा, अनिद्रा, हिस्टीरिया, शरीर की स्थूलता, घुटनों एवं टखनों के दर्द, जठर, यकृत, पेट दर्द के साथ ही हृदयगत अनेक रोगों को दूर करने के लिए पद्मासन का अभ्यास किया जाता है।
पद्मासन को करने के लिए दोनों पैरों को फैलाकर सीधे बैठ जाइए। उसके बाद दायां पैर बांए पैर की जांघ पर और बायां पैर दाएं पैर की जांघ पर रख दीजिए। कई लोगों को पहले दाईं जांघ पर बायां पैर और फिर उसके बाद बाईं जांघ पर दायें पैर को रखते हैं।
सहूलियत के अनुसार जांघ पर पैर को रखकर बैठ जाइए और दोनों हाथों के अंगूठों को तर्जनियों के साथ मिलाकर बायां हाथ बाएं पैर के घुटने पर और दायां हाथ दाएं पैर के घुटने पर रख दीजिए।
इसके बाद मेरूदण्ड और मस्तक सीधी रेखा में रखिए। आंखों को बंद या खुला रखिए और सांसों को धीमी गति से लेते छोडते जाइए। आंखों को बंद करके ध्यान मुद्रा धारण कर लीजिए। लगभग १०-१५ मिनट तक इसको करना चाहिए। प्रारंभ में कुछ परेशानी अवश्य हो सकती है परन्तु अभ्यास करते रहने से पद्मासन की यह मुद्रा सरल हो जाती है।
पद्मासन का दूसरा प्रकार बद्घ पद्मासन होता है। यह पद्मासन से कुछ कठिन होता है। यह आसन ध्यान के लिए नहीं होता किंतु स्वास्थ्य के सुधार के लिए एवं शरीर को सशक्त एवं सुदृढ बनाने के निमित्त होता है। इस आसन का अभ्यास क्रमश: धीरे-धीरे करना चाहिए।
बद्घ पद्मासन करने के लिए पैरों को जांघों पर क्रमश: चढाइए। पैरों को इतना ऊंचा रखिए ताकि वे पेट के नीचे वाले हिस्से को छूते रहे। इसके बाद दाएं-बाएं दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाइए। दाएं हाथ से दाएं पैर तथा बाएं हाथ से बाएं पैर के अंगूठे को पकड लीजिए। पैरों के अंगूठे पकडते समय कठिनाई पडती हो तो आगे की ओर झुक कर अंगूठे को पकिडए और अंगूठे पकडने के बाद फिर से सीधे हो जाइए।
इस स्थिति में आने के बाद सांसों को धीरे—धीरे चलाते रहिए। एक-दो मिनट से प्रारंभ करके इसे क्रमश: दस मिनट तक पहुंचाया जा सकता है। प्रारंभ में कठिनाई तो होती है परन्तु धीरे-धीरे सामान्य होता चला जाता है। इस आसन के करने से कमर, पेट, हृदय आदि पर दबाव पडता है। इससे उन स्थलों की नािडयां तनावमुक्त होकर पूर्ण स्वस्थ हो जाती हैं। इसके प्रभाव से स्तन एवं गुप्तांगों की नािडयां भी सक्रिय हो जाती हैं तथा रक्त का संचरण अच्छी तरह से होने लगता है। पद्मासन से निम्नांकित लाभ होता है।
• पद्मासन के नियमित अभ्यास से हृदय के रक्तसंचार की क्रियाओं पर अच्छा प्रभाव पडता है और हृदय से संबंधित अनेक बीमारियां स्वत: ही समाप्त होने लगती हैं।
• इस आसन के अभ्यास से दमा, अनिद्रा, हिस्टीरिया जैसे रोग भी दूर हो जाते हैं। अनिद्रा के रोगियों के लिए तो यह आसन अमोघ साधन है।
• हृदय के रोगियों के लिए अनिद्रा काफी खतरनाक मानी जाती है। अनिद्रा दूर करने के उपायों में यह सबसे अच्छा उपाय होता है।
• यह आसन शरीर की स्थूलता कम करने में भी सहायक है। इस आसन से जीवनशक्ति की वृद्घि होती है।
• इस आसन में दोनों घुटनों और टखनों के जोडों पर वजन पडता है जिससे पैरों के जोड सुदृढ बनते हैंं।
• इस आसन से दोनों पैरों की एिडयों को भी सम्पूर्ण व्यायाम मिलता है जिससे नितम्ब सम्पुष्ट होते हैं।
• इस आसन के लगातार करते रहने से हृदय, फेफडे, जठर, यकृत और मेरूदण्ड की अशक्ति धीरे-धीरे दूर होती है। स्तनों का विकास होता है तथा यौन शक्ति की वृद्घि भी होती है।
• इस आसन के करने से अपच, अफारा, पेट का दर्द, अजीर्ण आदि रोग मिट जाते हैं। हृदय रोगियों को इस आसन को नियमित करके फायदा उठाना चाहिए।

श्री सोनू कुमार गिरी (Wing Chun Kung Fu Martial Art Academy, India)
सौजन्य गोल्डन इंडिया

 

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